भारत और रूस ने किया समुद्री सहयोग पर दो ऐतिहासिक एमओयू पर हस्ताक्षर

नई दिल्ली : भारत और रूस ने समुद्री सहयोग में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर स्थापित किया है। दोनों देशों के बीच दो ऐतिहासिक समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए हैं, जिनका उद्देश्य कनेक्टिविटी को मजबूत करना, जहाज निर्माण क्षमता और दोनों देशों के बीच समुद्री सहयोग को आगे बढ़ाना है। दोनों देश अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे (आईएनएसटीसी), उत्तरी समुद्री मार्ग (एनएसआर) और चेन्नई-व्लादिवोस्तोक पूर्वी समुद्री गलियारे (ईएमसी) पर नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ेंगे। केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने कहा कि यह सहयोग भारत की समुद्री महत्वाकांक्षाओं को मजबूत करता है और साथ ही ठोस सामाजिक-आर्थिक लाभ भी प्रदान करता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत-रूस समुद्री सहयोग के एक नए अध्याय को आकार देने में एक निर्णायक भूमिका निभा रहा है। मेक इन इंडिया के तहत जहाज निर्माण को मजबूत करके, हिंद महासागर से आर्कटिक तक रणनीतिक गलियारों के माध्यम से संपर्क को आगे बढ़ाकर और अपने नाविकों को ध्रुवीय अभियानों के लिए अत्याधुनिक कौशल से लैस करके, हम तेज और लचीले व्यापार मार्ग बना रहे हैं, भविष्य के लिए तैयार रोजगार पैदा कर रहे हैं और वैश्विक अवसरों के नए क्षितिज खोल रहे हैं। ये समझौते सुरक्षित, आधुनिक और पारस्परिक रूप से लाभकारी समुद्री सहयोग के प्रति हमारी साझा प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं जो विकास, नवाचार और एक साझा समुद्री भविष्य को शक्ति प्रदान करेगा। भारत के जहाजरानी मंत्री सर्बानंद सोनोवाल, जो समुद्री सहयोग पर ऐतिहासिक भारत-रूस समझौता ज्ञापन के साक्षी बने, ने आगे कहा यह साझेदारी मेक इन इंडिया को बढ़ावा देती है, रोजगार सृजन करती है, हमारे नाविकों के लिए ध्रुवीय जल प्रशिक्षण के माध्यम से कौशल बढ़ाती है और साझा समुद्री भविष्य के लिए नए क्षितिज खोलते हुए क्षेत्रीय संपर्क को मजबूत करती है। यह सहयोग हिंद महासागर और आर्कटिक के बीच समुद्री संपर्क को पुनः परिभाषित करेगा तथा भारत-रूस साझेदारी को साझा विकास, वैश्विक सहयोग और एक सुदृढ़ आपूर्ति श्रृंखला नेटवर्क पर आधारित भविष्योन्मुखी ढांचे के रूप में स्थापित करेगा।

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Posted in Default Category on December 06 2025 at 05:53 AM

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